महिलाओं को आर्थिक स्वावलंबन प्रदान कर समाज में उनकी गरिमा को सनातन मूल्यों के अनुरूप पुनर्स्थापित करना तथा समग्र समाज को उनके सम्मान की रक्षा के लिए एकजुट करना।
दृष्टि
लक्ष्य
महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तीकरण कार्यक्रम चलाना।
युवा पीढ़ी को स्त्री सम्मान की शिक्षा देकर सामाजिक चेतना जागृत करना।
हिंसा और शोषण के विरुद्ध सामुदायिक नेटवर्क स्थापित कर सुरक्षा सुनिश्चित करना।
एकजुट महिला सशक्तीकरण
महिला सशक्तीकरण से जुड़ी संस्था की गतिविधियां एवं कार्यक्रम


सनातन धर्म में स्त्री को लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है, जो समृद्धि और सौभाग्य की अधिष्ठात्री होती हैं। स्त्री धन का अर्थ केवल आर्थिक संसाधन नहीं, बल्कि स्त्री की सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और सम्मान सुनिश्चित करना है। स्त्री को धन और संसाधनों तक समान अधिकार देना धर्म, न्याय और करुणा का प्रतीक है। यह व्यवस्था परिवार और समाज दोनों में संतुलन एवं स्थायित्व लाती है।


कुमारी पूजन शक्ति साधना का एक अनिवार्य अंग है। इस अनुष्ठान में कुमारियों का षोडशोपचार पूजन शक्ति के रूप में किया जाता है। कुमारी के स्वरूप के विषय में शाक्त तांत्रिक स्मृतिकारों से भिन्न मत रखते हैं। स्मृति के अनुसार अष्ट वर्षीया बालिका को 'गौरी', दस वर्षीया को 'कन्यका' तथा द्वादश वर्षीया को 'कुमारी' कहा जाता है।
संस्थागत गतिविधियाँ
सनातन धर्म में कन्याओं का सम्मान समाज की नैतिक ऊँचाई का मापदंड माना गया है। कन्याओं के सम्मान में वृद्धि से सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों का विकास होता है। यह भाव भविष्य की पीढ़ियों को संस्कार, सुरक्षा और आत्मविश्वास प्रदान करता है। कन्याओं का सम्मान करना केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि धर्म और संस्कृति की आधारशिला है।


स्त्री धन
नवरात्रि कन्या पूजन
कन्याओं का विशेष संरक्षण
हमारे न्यूजलेटर प्राप्त करें
यहाँ अपना ई-मेल प्रदान कर हमारे न्यूजलेटर प्राप्त करें
